मां कूष्मांडा की पूजा करने से होती है मनवांछित फल की प्राप्ति, जानिए पूजा विधि

मां कूष्मांडा की पूजा करने से होती है मनवांछित फल की प्राप्ति, जानिए पूजा विधि

नवरात्रि के चतुर्थ दिन मां कूष्मांडा की पूजा करने का विधान है…इनकी आठ भुजाएं हैं इसलिए कुष्मांडा देवी को अष्टभुजा भी कहा जाता है…मां के सात हाथों में कमण्डल, धनुष-बाण, गदा, कमल-पुष्प, अमृत कलश और चक्र हैं और आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जपमाला है…कुष्मांडा देवी की सवारी सिंह है.. मान्यता है कि देवी कुष्मांडा ने संपूर्ण ब्रह्मांड की रचना की थी..

पूजा विधि
नवरात्रि के चौथे दिन स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद मां कुष्मांडा स्वरूप की विधिवत पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है…पूजा में लाल रंग के फूल, गुड़हल या गुलाब के फूल भी प्रयोग करें…इसके बाद सिंदूर, गंध, धूप, अक्षत् आदि मां को अर्पित करें…पूजा के दौरान सफेद कुम्हड़े की बलि देने की भी परंपरा है..मान्यता है ऐसा करने से मां प्रसन्न होती हैं और पूजा सफल होती है…मां को दही और हलवे का भोग लगाएं और बाद में प्रसाद वितरित करें…

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कुष्मांडा मां की विधि विधान से पूजा करने से आयु, यश, बल और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है… साथ ही मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं…बताते हैं कि मां कुष्मांडा संसार को कष्टों और संकटों से मुक्ति दिलाती हैं…इस दिन लाल रंग के फूलों से पूजा करना उत्तम माना जाता है क्योंकि कुष्मांडा देवी को लाल रंग के फूल अधिक प्रिय बताए गए हैं….मां कुष्मांडा की पूजा विधि पूर्वक करने के पश्चात दुर्गा चालीसा और मां दुर्गा की आरती अवश्य करनी चाहिए…लाभ होता है…

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Pratiksha Srivastava

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