कहां बसती हैं गुप्त गोदावरी, क्या है इस नदी का रहस्य

विंध्य पर्वतमाला में दो गुफाओं में से दो जल-धाराएं फूटती हैं,एक गुफा से एक धारा निकल कर निचे एक कुंड में गिरती है जिसे सीता कुंड कहते है.
दूसरी गुफा कुछ नीचे है, इस गुफा में एक जलधारा प्रवाहित होती है, गुफा संकरी होती हुई बंद हो जाती है जहां गुफा बंद होती है वहीं से पानी आता है और कुछ दूर बहने के बाद वह जल एक पीपल के वृक्ष के पास पहुंचकर गुप्त हो जाता है.गोदावरी नदी एक पहाड़ के अंदर ही सिमट गई है. यहां से बाहर निकलने पर नदी दिखाई नहीं देती है. इसका उद्गम स्थल भी यहीं है और ये सिमटी भी यहीं है. इसलिए इसे गुप्त गोदावरी कहा जाता है। बताया जाता है कि यहां देवी सीता स्नान किया करती थीं.


वैज्ञानिक भी हार गए ये पता करते करते की आखिर ये नदी आती कहाँ से है और फिर पीपल की पेड़ के निचे गायब कहाँ हो जाती है . इसका आज तक पता नहीं चल पाया है . बहार निकल कर देखने पर वह कुछ भी दिखाई नहीं देता है की इस गुफा के अंदर कोई नदी भी है .

माना जता है की जब भगवान् राम यहाँ बनवास के समय रुके थे तो माँ गोदावरी या माँ गंगा उनसे गुप्त तरीके से मिलने आयी थी . ये भी एक कारण है इसे गुप्त गोदावरी कहते है.

Pratiksha Srivastava

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