पैदल रास्तों पर जिंदगी का बोझ लिए चल रहे हैं, मंजिल के इंतजार में

पैदल रास्तों पर जिंदगी का बोझ लिए चल रहे हैं

न जाने कितनी सांसे थम रही हैं मंजिल के इंतजार में

ये कहते है कि भूख से तो इनका जन्मों का नाता था

पर अब तो ठिकाने भी छिन गए है लाचारी के इस बयार में

कुछ ऐसे ही हालात हैं उन पलायन परते मजदूरों के जिन्हें मंजिल को पाने के लिए न जाने कितने दूर तक जाना है… भूख और लाचारी से डरे सहमे ये लोग मजबूर हैं अपने घर वापस जानें को… इस लॉकडाउन में हम सबने न जाने कितनी दिक्कतें उठाई हैं… लेकिन जिन्होंने अपना सबकुछ खो दिया है वो है ये पलायन पर मजबूर ये मजदूर… चेहरे पर दर्द लिए और हाथे में कुछ गिने चुने समान… रास्ते में चलते न मासूमों की हालत देख कर आपका मन भी सिहर जाए… जिन्हें ये तक नहीं पता कि अभी हाजारों किलोमीटर और चलना है.. बारिश, धूप से होकर गुजरना है…

सरकार के लाख दावों के बाद भी इनका पैदल पलायन नहीं रुक रहा है… हजारों मजदूर आए दिन अपने घर की ओर जा रहे हैं… इनका दर्द सुनकर मन दुखी हो जाता है मकान मालिकों ने घर से निकाल दिया यहां तक की समान भी रख लिया… कामबंद होने का हवाला देकर इन्हें काम से भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया…. की रासता बचा तो बस पैदल घर जाने का…. भूख में तड़पते इन चेहरों पर बस उदासी है और सामने एक बड़ा लंबा और कठिन रास्ता….

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Pratiksha Srivastava

A multi-talented girl possesses a degree in mass communications who is proficient in anchoring and writing content. She has experience of 3 years for working in various news channels like India TV, News 1 India, FM news, and Aastha Channel and her expertise lies in writing for multiple requirements including news, blogs, and articles. Follow@Twitter

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