हैदराबाद केस-ये देश आज शर्मिंदा है, आजाद हर दरिंदा है

“आज देश आजाद है आजाद हैं हर परिंदे पर लड़की नहीं है आजाद यहां खुलेआम जो घूम रहे वहशी दरिंदे”

ये चंद लाइने नहीं है ये इस देश के हालात हैं वो हालात जो आज भी यहां हर लड़की की दशा को बयां करते हैं… जो बयां करते हैं हर महिला के मन का डर, हर लड़की के माता पिता की कभी न मिटने वाली चिंता… जो बयां करते हैं वो दर्द जो एक औरत ही महसूस कर सकती है… रेप एक ऐसा घाव है जो शरीर से चला जाता लेकिन एक लड़की को जिंदगी भर का जख्म दे जाता है…

एक लड़की हूं शायद इसिलिए वो दर्द सिर्फ अपनी लाइनों में बयां नहीं कर रही बल्कि महसूस कर रही हूं, वो गुस्सा मुझे सोने नहीं दे रहा… क्यों आखिर क्यों लड़कियों बस एक सामान की तरह देखा जाता है, और कब तक ये सब कुछ ऐसे ही खुलेआम होता रहेगा… किसपर भरोसा करूं, किसे साथ खुद को महफूज समझूं, कहां निकलूं, किसे बता कर जाऊं ससे मदद मांगू, किससे गुहार लगाऊं.. यहां तो हर कदम कोई हमारी ताक में बैठै है… ये वो भेड़िएं जिन्हें हम और आप कभी पहचान नहीं सकते… और जिनके चंगुल से कभी बच नहीं सकते… जो धर्म नहीं देखते जात नहीं देखते अरे ये तो उम्र भी नहीं देखते… देखते हैं तो बस एक लड़की और उसकी वो शरीर जिसे नोंचने के लिए ये तैयार बैठे रहते हैं…

मां कहती है बेटा जल्दी आ जाना, पापा कहते है बेटा मोबाइल साथ ही रखना, भाई कहता है रुको मैं छोड़ देता हूं… फ्रेंड कहते है मत जा रात हो गई है… पति कहता है अकेली क्यों जा रही हो… ये चिंताएं क्यों औक कब तक… कभी कोई बस में तो कभी कोई स्कूटी से… कभी घर पर तो कभी बाहर में… कभी स्कूल में तो कभी ऑफिस में… और कभी किसी मदरसे में तो कभी किसी मंदिर में… शायद भगवान भी खुद को यहां सुरक्षित नहीं समझते तभी तो वो भी नहीं आते….

इस दर्द को कैसे छुपाउं मैं

इस डर को कैसे दिखाऊं मैं

बेचैन बड़ा ये दिल है आज

इस मन को शांत कराऊं मैं

Pratiksha Srivastava

@pratiks36264487

Pratiksha Srivastava

Pratiksha Srivatava has a keen interest in writing news blogs info articles related to health, politics, food, entertainment, sports, fashion.

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