भीड़तंत्र के वार के और कितने शिकार?

अक्सर आपने पूरानी फिल्मों देखा होगा.. जब पुलिस या कानून किसी मुजरिम को जसा नहीं सुनाता था… तो हिरो के साथ पूरा का पूरा शहर खड़ा हो जाता था.. और औरोपी को सजा देता था… आरोपी आगे आगे और भीड़ पीछे पीछे… ये देख उस वक्त शायद हम काफी उत्साहित भी होते थे.. लेकिन आज इस ड्रामे ने हकिकत की शक्ल ले ली है.. और हकिकत भी ऐसी कि किसी की जान तक ले सकती है… एक ऐसी भयानक शक्ल जो ना जुरिम देखती है ना आरोप बस सीधा इंसाफ करती है…

जी हां बात यहां मॉब लिंचिंग यानी भीड़तंत्र की हो रही है… जिसके भेंट रोज कितनी ही जिंदगी चढ़ रही हैं…कबी धर्म के नाम पर कभी जाति के रूप में तो कभी चोरी या किसी और शक्ल में… हर रोज हजारों तबरेज और अर्जुन और धर्मेंद्र इस भीड़तंत्र का शिकार होते हैं…

हल्ला होता है, सोशल मीडिया पर लोग एक दूसरे को गालियां देते हैं… फिर ये क सियासी मुद्दा बन जाता है और सभी पार्टियां इस पर रोटियां सेंकना शुरु कर देती हैं…. सभी न्यूज नल पर डिबेट भी हती है और अंत में सब खत्म और फिर किसी का नंबर आ जाता है बलि चढ़ने के लिए…

अब भीड़ की कोई शक्ल तो होती है नहीं कि उसे पकड़ कर सजा दी जाए… भीड़ तो भीड़ है… या यूं कहें कि एक आईनहैह जिसमें समाज के ठेकेदारों की गंदी शक्ल छुपी होती है… जो बाहर से देख कर तो बहुत खूबसूरत लगती है लेकिन अंदर से उतनी ही डरावनी और बदसूरत होती है…

अगर आप ये सोच रहे हैं कि आप इसके शिकार थोड़े ही हैं.. तो आप गलत हैं ये भीड़ है साहब ये किसी की सगी नहीं होती ना किसी की अपनी होती है… शायद आज आप इसका हिस्सा हों लेकिन कल आप इसके शिकार भी हो सकते हैं….

Pratiksha srivastava

Pratiksha Srivastava

Pratiksha Srivatava has a keen interest in writing news blogs info articles related to health, politics, food, entertainment, sports, fashion.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *