तेजी से घूमकर चक्कर पूरा कर रही है धरती, वैज्ञानिकों की बढ़ी चिंता, इंसानो पर मंडराया खतरा!

तेजी से घूमकर चक्कर पूरा कर रही है धरती, वैज्ञानिकों की बढ़ी चिंता, इंसानो पर मंडराया खतरा!


धरती का अपनी धुरी पर अचानक से तेज गति के साथ घूमना अब वैज्ञानिकों के लिए भी चिंता का विषय बन गया है. बीते 50 सालों के बीच य पहली बार हुआ है, जब किसी भी वक्त की तुलना में पृथ्वी इतनी तेजी के साथ घूम रही है. वैज्ञानिकों की भी नींद इसी बात से उड़ी हुई है, आखिर इसे किस तरह से मैनेज किया जाए. इन दिनों धरती सामान्य गति से भी बहुत ज्यादा तेजी से दौड़ रही है, यहां तक कि अपना 1 चक्कर भी 24 घंटे से पहले ही खत्म कर दे रही है. बताया जा रहा है कि, धरती में आया अचानक से ये परिवर्तन बीते साल के मध्य में देखने को मिला था. तब से अब तक यह प्रैक्रिया जारी है. यदि होता रहा तो इसका इंसानी जीवन पर क्या असल होगा, चलिए आपको इस रिपोर्ट के जरिए बताते हैं.
इस बात से हर शख्स वाकिफ है कि धरती एक धुरी का चक्कर 24 घंटे में पूरा करती है. लेकिन गुजरे साल के जून महीने से अब तक धरती अपनी धुरी पर और भी तेज गति के साथ घूम रही है. इसके कारण हर देश का समय बदल जा रहा है. ऐसे ही अगर होता रहा तो साइंटिस्ट्स को भी अपनी-अपनी जगहों पर मौजूद एटॉमिक क्लॉक का वक्त धरती के मुताबिक चेंज करना पड़ेगा. इससे जाहिर है कि इस बार साइंटिस्ट्स को निगेटिव लीप सेकेंड अपनी-अपनी घड़ियों में जोड़ना पड़ेगा. साल 1970 से लेकर अब तक कुल 27 लीप सेकेंड जोड़े जा चुके हैं.


ब्रिटिश वेबसाइट डेली मेल की ओर से जारी की गई एक रिपोर्ट की मानी तो बीते कई दशकों से धरती 24 घंटे के समय से ज्यादा वक्त लेकर अपनी धुरी पर घूम रही थी, लेकिन बीते साल जून महीने से 24 घंटे से भी कम वक्त में वो अपना ये चक्कर पूरा करने लगी है. फिलहाल धरती अभी 24 घंटे में 0.5 मिलीसेकेंड कम समय लेकर घूम रही है.


2020 से पहले की बात करें तो सबसे छोटा दिन 2005 में देखने को मिला था. लेकिन तब से अब तक ये रिकॉर्ड कुल 28 बार टूटते हे देखा गया है. जिसका परिणा केवल एटॉमिक क्लॉक पर ही नहीं बल्कि इसके कारण कई तरह की परेशानियों का भी सामना करना पड़ सकता है. खासकर हमारी संचार व्यवस्था में कुछ दिक्कतें आ सकती है. क्योंकि सैटेलाइट्स और संचार यंत्र सोलर समय के मुताबिक ही सेट किए जाते हैं. ये वक्त तारे, चांद और सूरज के पोजिशन के मुताबिक सेट किए जाते हैं.


नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी के सीनियर रिसर्च साइंटिस्ट पीटर व्हिब्बर्ली ने इस बारे में बात करते हुए कहा है कि, धरती अपने तय वक्त के कम वक्त में एक चक्कर पूरा कर रही है. ये गतिविधि बीते 50 सालों में पहली बार देखने को मिला है. ऐसा हो सकता है कि धरती पर रहे लोगों को समय के साथ चलने के लिए निगेटिव लीप सेकेंड जोड़ना पड़े.

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Pratiksha Srivastava

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