दशहरा स्पेशल- 5 ऐसे स्थान जहां रावण की पूजा की जाती है

दशहरा स्पेशल- 5 ऐसे स्थान जहां रावण की पूजा की जाती है

इस साल विजय दशमी का पर्व रविवार 25 अक्टूबर को मनाया जाएगा…हर साल दशहरे के दिन रावण का पुतला फूंका जाता है क्योंकि भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध किया था… इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है…लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में कई ऐसे स्थान भी हैं जहां रावण दहन नहीं बल्कि उसकी पूजा की जाती है…ऐसे कौन से स्थान हैं चलिए जानते हैं…

मध्य प्रदेश
मध्यप्रदेश के मंदसौर में रावण की पूजा की जाती है…बताते हैं कि पहले मंदसौर का नाम दशपुर था और ये रावण की पत्नी मंदोदरी का मायका था…इसलिए इस शहर का नाम मंदसौर पड़ा…पत्नी का मायका होने के नाते रावण यहां का दामाद था…इसलिए दामाद के सम्मान की परंपरा को निभाते हुए यहां के लोग रावण के पुतले का दहन करने के बजाय उसकी पूजा करते हैं…मंदसौर के खानपुरा क्षेत्र में रावण रूण्डी नाम के स्थान पर रावण की विशाल मूर्ति है…

हिमाचल प्रदेश
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में शिवनगरी के नाम से प्रसिद्ध बैजनाथ नामक कस्बा है, जहां के लोग रावण के पुतले को जलाना पाप समझते हैं…यहां पूरे श्रृद्धाभाव से रावण की पूजा अर्चना की जाती है.. मान्यता है कि यहां रावण ने भगवान शिव की कठोर तपस्या कर मोक्ष का वरदान प्राप्त किया था…

कर्नाटक
कर्नाटक के कोलार जिले में एक फसल महोत्सव का आयोजन किया जाता है और इस दौरान यहां के लोग रावण की पूजा करते हैं…इस मौके पर जुलूस भी निकाला जाता है…जैसा कि रावण भगवान शिव का बहुत बड़ा भक्त था, इसलिए यहां के लोग रावण की पूजा करते हैं…लंकेश्वर महोत्सव के समय यहां भगवान शिव के साथ रावण की प्रतिमा भी जुलूस में निकाली जाती है…इसके अलावा यहां के मंडया जिले के मालवल्ली तहसील में रावण का एक मंदिर भी मौजूद है..

उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में भी रावण को पूजा जाता है..यहां रावण का प्रसिद्ध दशानन मंदिर भी है… यहां के शिवाला इलाके में स्थित दशानन मंदिर में शक्ति के प्रतीक के रूप में रावण की पूजा की जाती है.. इस दौरान यहां के लोग तेल के दिए जलाकर, रावण से मन्नतें मांगते हैं और उसकी प्रार्थना करते हैं…

कहते हैं कि इस मंदिर का निर्माण 1890 में हुआ था…अनोखी बात है कि इसे साल में केवल एक बार दशहरे के दिन ही खोला जाता है…रावण की प्रतिमा का श्रृंगार किया जाता है और फिर आरती होती है… दशहरे के दिन इस मंदिर में बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं…

बता दें शाम ढलते ही मंदिर के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं वो भी एक साल के लिए..फिर यह मंदिर अगले दशहरे के दिन ही खोला जाता है… इसके अलावा उत्तर प्रदेश के बिसरख गांव में रावण का एक मंदिर है…ये गांव गाजियाबाद से सिर्फ 15 किलोमीटर दूर स्थित है…बताते हैं कि ये रावण का ननिहाल था…पहले इसका नाम विश्वेश्वरा था, जोकि रावण के पिता के नाम पर पड़ा.. लेकिन अब इसे बिसरख के नाम से जानते हैं..

राजस्थान
जोधपुर जिले में मन्दोदरी नाम की ऐसी जगह है जिसे रावण और मन्दोदरी का विवाह स्थल माना जाता है… आज भी इस विवाह स्थल पर रावण की चवरी नामक एक छतरी मौजूद है…शहर के चांदपोल क्षेत्र में रावण का मंदिर बना है…

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Pratiksha Srivastava

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