25 जून… इंदिरा गांधी सरकार… और आपातकाल का वो काला अध्याय

25 जून… इंदिरा गांधी सरकार… और आपातकाल का वो काला अध्याय

25 जून की उस दिन को 45 साल हो गए… वो दिन जब भारत की जनता ने कुछ ऐसा देखा और सुना जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी… वो समय जब एक रात में लोगों से उनके कई मौलिक अधिकार छीन लिए गए…. वो समय जब कांग्रेस के खिलाफ विरोध चरम सीमा पर पहुंच गई थी, वो समय जिसने कांग्रेस को सत्ता से आखिरकार हिला ही दिया,और यही वो दौर था जब किसी गैर कांग्रेसी पार्टी ने देश में अपना परचम लहराया.

आपातकाल का वो फैसला

देश की लौह महिला कही जाने वाली इंदिरा गांधी जी को आखिर देश में ऐसी आपातकाल लगाने की घोषणा क्यों करनी पड़ी… और क्यों इस दिन को आज भी लोग एक काले दिन की तरह याद करते हैं… दरसल आजादी के बाद से देश में कांग्रेस ने राज किया… लेकिन इंदिरा जी के कुछ फैसलों का देश में विरोध होने लगा उसमें कई लोग शामिल हुए… जो कांग्रेस के खिलाफ एक जुट हो रहे थे… जिसके बाद संजय गांधी के साथ मिलकर इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल की घोषणा कर दी… आचानक आधी रात में लगे इस आपातकाल से किसी को कुछ समझ नहीं आया…. वहां कांग्रेस अपना दाव खेल रही थी, और यहां विपक्ष अपने काम को अंजाम देने में लगा था…. जहां इस आपातकाल से जहां इंदिरा सरकार अपनी गद्दी बचाना चाहती थी, वहीं विपक्ष ने इस उनके ही खिलाफ भुनाया. और देखते ही देखते इंदिरा गांधी को चाहने वाले भी उनके खिलाफ खड़े नजर आने लगे.

क्या थी ये आपातकाल

इस आपातकाल की कहानी शुरु हुई 12 जून 1975 को 1971 में इंदिरा गांधी रायबरेली से सांसद चुनी गईं. इंदिरा गांधी के खिलाफ संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के प्रत्याशी राजनारायण ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की. राजनारायण ने अपनी याचिका में इंदिरा गांधी पर कुल 6 आरोप लगाए… जिसमें एक आरोप था चुनाव में सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग जिसमें इंदिरा गांधी दोषी पाया गयी.. जिसके बाद उनके चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लग गया… और साथ ही उनके निर्वाचन को रद्द कर दिया गया… जहां एक तरफ इंदिरा गांधी गद्दी बचाने के जद्दोजहद में लगी हुईं थी वहीं विपक्ष के सुर उनके खिलाफ तेज हो रहे थे… इंदिरा जी समझ गईं थीं कि ये आग अब बड़ी हो गई है और इसे काबू करना मुश्किल है.. ऐसे में विपक्ष के बढ़ते दबाव के बीच इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 की आधी रात को तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद से इमरजेंसी के घोषणा पत्र पर दस्तखत करा लिए. इसके तुरंत बाद जयप्रकाश नारायण, अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, मोरारजी देसाई समेत सभी विपक्षी नेता गिरफ्तार कर लिए गए. 26 जून 1975 को सुबह 6 बजे कैबिनेट की एक बैठक बुलाई गई. इस बैठक के बाद इंदिरा गांधी ने ऑल इंडिया रेडियो के ऑफिस पहुंचकर देश को संबोधित किया और देश में आपातकाल की घोषणा कर दी… 21 महीने तक चले इस आपातकाल को 21 मार्च 1977 को खत्म करने की घोषणा की गई. इस बीच  11 लाख लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था…

इस आपातकाल में कई ऐसे फैसले लिए गए जो देश हित में नहीं थे… संजय गांधी ने कई ऐसी मनमानी की जो शायद लोगों को काफी नागवार गुजरी, जैसे इस दौरान की लोगों की जबरदस्ती नसबंदी करा दी गई. अखबार की स्वातत्रंता खत्म कर दी गई. लोगों से उनके बोलने के अधिकार खत्म कर दिए गए… और इसिलिए ये आपातकाल न सिर्फ देश के लिए बल्कि खुद कांग्रेस के लिए भी काफी खतरनाक साबित हुआ..

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Pratiksha Srivastava

A multi-talented girl possesses a degree in mass communications who is proficient in anchoring and writing content. She has experience of 3 years for working in various news channels like India TV, News 1 India, FM news, and Aastha Channel and her expertise lies in writing for multiple requirements including news, blogs, and articles. Follow@Twitter

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