प्रयोगों में असफल हुए तो छोड़ दी पार्टी की कमान….

राहुल गांधी ने जो सोचा वो किया… लाख जतन किए गए… लाख मिन्नते की गयी… लेकिन राहुल तो राहुल हैं.. अपने फैसले पर अड़े रहे और वो कर के दिखाया जो करना चाहते थे… पद छोड़ा और पार्टी बागडोर भी…. लेकिन ऐसा क्या हुआ जो उन्होंने ये फैसला लिया…

साल 2017 में राहुल ने पार्टी की बागडोर संभाली

 इसकी बड़ी वजह रहा इस बार का चुनाव… लेकिन इसकी शुरुआत तो काफी पहले हो चुकी थी… चुनाव 2014 जब कांग्रेस को हराकर बीजेपी सरकार ने बड़ी जीत हासिल की… इसके बाद राहुल गांधी को पहली बार 2017 में पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया… लोगों को लगा कि इससे पार्टी को अच्छा फायदा होगा… लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं… मोदी सरकार के खिलाफ राहुल गाधीं ने कई प्रयोग किए…

अखिलेश सरकार से किया गठबंधन

उनका पहला प्रयोग था 2017 में अखिलेश यादव के साथ गठबंधन करना… मिशन यूपी को लेकर ये गठबंधन किया गया था… लेकिन ये बंधन कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाया.. और दोनों की राहें अलग हो गईं….

युवा चेहरों पर बड़ी जिम्मेदारी

राहुल गांधी ने युवाओं को साथ रखकर चलने का फैसला किया जिसमें सचिन पायलट और ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम सामने आया जिन्हें पार्टी की बड़ी जिम्मेदारी दी गई…

महागठबंधन का लिया सहारा

जिसके बाद राहुल गांधी ने महा गठबंधन का सहारा लिया और बाकी पार्टियों के साथ मिलकर मोदी सरकार के खिलाफ जंग छेड़ा ये गठबंधन भी ज्यादा दिन तक नहीं टिक सका… और जल्द ही सभी पार्टियां अपने अपने राह निकल गईं…

मोदी के पॉपुलरटी को भी भुनाया

राहुल गांधी के प्रयोगों में एक प्रयोग ये भी था… कई बार ऐसा देखा गया कि राहुल गांधी सोशल मीडिया पर मोदी के पॉपुलरटी को भुनाते दिखे… कभी संसद में मोदी को गले लगाना तो कभी संसद में आंख मारना…

बहन प्रियंका को जंगी मैदान में उतारा

2019 चुनाव से पहले राहुल गांधी ने अपना सबसे बड़ा पत्ता खोला… और प्रियंका गांधी को जंगी मैदान में उतार दिया… प्रियंका के सामने आने से लोगों में एक अलग उत्साह भी आया… लेकिन ये उत्साह कुछ कमाल नहीं दिखा पाया और एक बार फिर कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा…

और शायद यही वजह रही कि आखिरकार राहुल गांधी ने इतना बड़ा फैसला लिया… लेकिन सवाल ये है कि जिस कांग्रेस को हम गांधी परिवार से जानते है… वो अब गांधी परिवार के अधीन नहीं रहेगा? क्या गांधी परिवार का वर्चस्व बस यहीं तक था….? क्या ये फैसला उनका निजी है या ये एक सियासी फैसला है… ये वक्त ही बताएगा… फिलहाल कांग्रेस को उसके नए अध्यक्ष का इंतजार है

pratiksha srivastava

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