तंत्रिक,रानी और किले कि कहानी, भानगढ़ का डरावना सच…

तंत्रिक,रानी और किले कि कहानी, भानगढ़ का डरावना सच…

शाम हो चुकी है और शाम के बाद यहां आना सख्त मना है, ये वो जगह है जिसका पीछा कुछ अंजानी ताकते वर्षो से कर रहीं हैं, वर्षो से कुछ डरावनी ताकते इसे अपने चंगुल में जकड़े हुऐ है, शायद तभी शाम के बाद लोग यहां से गुजरना भी नही चाहते. क्या सचमुच यहां रात में रुकना खतरनाक है, क्या यहां रुकने वाला अगली सुबह नहीं देख पाता. क्य़ों आती है यहां से अजीबो गरीब़ आवाज़े, आखिर क्यो लोग यहां आने से भी डरते है, शाम होते ही ये जगह क्यों हो जाती है विरान.

इन खडंहरो का क्या है सच

ऐसी एक जगह जहां मौत का साया बनकर रूहें घुमती हों, जहां जिंदगी और मौत साथ चलती हो, एक अजीब दुनिया जिसके बारें में कोई अंदाजा नहीं हो। दुनियाभर में कई ऐसे कई जगह है, जिनका अपना एक अलग ही काला अतीत है और वहां आज भी रूहों का वास है। दुनिया में ऐसी जगहों के बारें में लोग जानते है, लेकिन बहुत कम ही लोग होते हैं, जो इनसे रूबरू होने की हिम्मत रखतें है। ऐसी ही इक जगह है भानगढ़…

भानगढ़ की भयानक और रूह कंपा देने वाली कहानियों के चलते पुरातत्व विभाग की ओर से वहां एक बोर्ड लगा दिया गया है। उस पर साफ लिखा है- सूरज ढलने से पहले यहां से चले जाएं। शायद डर का साया ही ,आज भानगढ़ की पहचान बन गया है, लोग यहां सूर्यास्त के बाद जाने में हिचकते है, लोगो को डराने वाला भानगढ़ क्या हमेशा से ऐसा ही था, अलवर जिले में सरिस्का अभयारण्य के पास स्थित है, भानगढ़ कभी बहुत ही खूबसूरत किला हुआ करता था, अरावली पर्वतमालाओं की हरी भरी गोद में बिखरे भानगढ़ के इन खंडहरों में भले ही आज भूतों का भय पसरा हो, लेकिन किसी समय यहां जिंदगी मचला करती थी। भानगढ़ एक भव्य और आबाद इलाका था। इसके किले और कस्बे में राजसी वैभव बिखरा रहता था। बताया जाता है इस शानदार किले को एक भव्य तरिके से तैयार किया गया था। इसके किले और कस्बे में राजसी वैभव बिखरा रहता था। बताया जाता है कि भानगढ़ के किले को आमेर के राजा भगवंतदास ने 1573 में बनवाया था। बाद में मुगल बादशाह अकबर के नवरत्नों में शामिल भगवंतदास के बेटे मानसिंह के छोटे भाई माधोसिंह ने इसे अपनी रिहाइश बना लिया। उस समय भानगढ़ का वैभव चरम पर था। इसकी जनसंख्‍या तकरीबन 10,000 थी।  किले के अंदर करीने से बनाए गए बाजार, खूबसूरत मंदिरों, भव्य महल और तवायफों के आलीशान कोठे हुआ करते थे।  तो ऐसा क्या हुआ की जहां जिंदगी हंसती थी, वहां मौत मंडराने लगी।

हंसता खेलता भानगढ़ कैसे हुआ वीरान

पुराने,उजड़े और विरान पड़े भानगढ़ किले का मौत, हादशो और रूहो से अलग ही नाता है, ये खंडहर अपने अंदर कितने ही राज दफन किए हुए है, कितनी ही कहानियां इन जगहो पर शुरु हुई और खत्म हो गई। जितना मशहूर भानगढ़ का किला है, उतना ही मशहूर है इल किले की कहानी। माना जाता है कि 16वीं शताब्दी में भानगढ़ बसा था, और 300 साल तक भानगढं खूब फलता रहा, लेकिन उसके बाद तो मानों की इसे किसी की नजर लग गई। इसमें ऐसा कुछ हुआ कि आज ये वीरान पड़ा हुआ है। कभी हंसता खेलता भानगढ़ जैसे विरान शमसान बन गया। कहा जाता है कि भानगढ़ की राजकुमारी सहित पूरा समाज्य भी मौत के मुंह में चला गया था। कहते है कि भानगढ़ कि राजकुमारी रत्नावती हुआ करती थी, जैसा नाम वैसी ही उनकी खूबसुरती राजकुमारी रत्नावती बेहद खुबसुरत थी। उस समय उनके रूप की चर्चा पूरे राज्य में थी और देश के कोने कोने  से राजकुमार उनसे विवाह करने के इच्छु‍क थे। उसका एक चाहने वाला महारथ तांत्रिक सिंधु सेवड़ा भी था। वो राजकुमारी  को वश में करने लिए काला जादू करना चाहता था। पर खुद ही उसका शिकार हो कर मर गया। पर मरने से पहले भानगढ़ को बर्बादी का श्राप दे गया था। और संयोग से उसके एक महीने बाद ही पड़ौसी राज्य अजबगढ़ से लड़ाई में सारे भानगढ़ वासी मारे गऐ, यहां तक की राजकुमारी रत्नावती भी उस श्राप से नहीं बच सकी और उनकी भी मौत हो गयी, और भानगढ़  वीरान हो गया,  तब से वीरान हुआ भानगढ आज तक वीरान है, और कहते है कि उस लड़ाई में मारे गए लोगो के भूत आज भी रात को भानगढ़ के किले में भटकते है।क्योकि तांत्रिक के श्राप के कारण उन सब को  मुक्ति नहीं मिल पाई थी। तब से लेकर आजतक भानगढ़ फिर से नहीं बस सका, वैसे भानगढ़ के सोमेशवर महादेव मंदिर में सिंधु सेवड़ा  तांत्रिक के वंशज ही  पूजा पाठ कर रहे ह। यहां के लोगो की माने तो, भूत किले के अंदर केवल खंडहर हो चुके महल में  ही रहते है, महल  से निचे नहीं आते है क्योकि महल की सीढ़ियों  के बिलकुल पास भोमिया जी का स्थान है जो  उन्हें महल से बाहर नहीं आने देते है। वैसे  इस जगह पर अगर कोई स्थान आजतक  सुरक्षित है तो वो है यहाँ पर स्तिथ मंदिर |  इस किले में कई मंदिर है जिसमे  भगवान सोमेश्वर, गोपीनाथ, मंगला देवी और केशव राय के मंदिर प्रमुख मंदिर हैं।
जहाँ किले सहित पूरा भानगढ़ खंडहर में तब्दील हो चूका है वही भानगढ़ के सारे के सारे मंदिर सही है अलबत्ता अधिकतर मंदिरो से मुर्तिया गायब है। ये भी भानगढ़ के रहस्यो का एक हिस्सा है। हजारों रहस्यों को समेटें भानगढ़ अपने आप में ही एक रहस्य है।

मौत,हादसों से भानगढ़ का नाता

अतीत के डरावने सायों से अपनी अनसुलझे वर्तमान को ले कर चल रहा भानगढ़ आज भी खामोश है, लेकिन कहते हैं कि कहानियां चुप नहीं होती,  वे खुद-ब-खुद अपनी दास्तां बयां कर देती है। लोग तो बहुत कुछ कहते है, लेकिन ये खंडहरे चुप है, क्योंकि उसने पास जुबान नहीं है.. क्या है यहां की सच्चाई, क्या है इसके भीतर समाए अतीत का राज शायद लोग आज भी इसे जानने के लिए यहां हर रोज आते है, पर इस किले में प्रवेश करने वालों को पहले ही चेतावनी दे दी जाती है कि वे सूर्यास्त के बाद इस किले ही नहीं इसके आस पास के इलाके में न आएं वरना उनके साथ कुछ भी भयानक घट सकता है। यहां के स्थानीय निवासी बताते हैं कि रात के समय इस किले से तरह तरह की भयानक आवाजें आती हैं। उनका तो यह भी कहना है कि आज तक रात के समय जो भी इस किले के अंदर गया वह वापस नही लौटा। लोग कहते हैं कि इस किले में रात को आने वाला वापस नहीं जा पाता। हालांकि बड़ी तादाद में लोग यहां घूमने के लिए आते हैं लेकिन रात होने से पहले ही वापस चले जाते हैं। रात के वीराने में कोई यहां फटकता भी नहीं है। दिन के समय में भी भानगढ़ में खामोशी पसरी रहती है। सिर्फ यहां सैर करने वाले सैलानी ही यहां आते है वो भी दिन में। लेकिन ज्यादातर सैलानियों का कहना है कि उनको दिन में भी यहां पर अजीब तरह का अहसास होता है। कुछ बैचेनी और हल्की-सी सिहरन। वहीं तेज हवाओं साथ यहां केवड़े की खुशबू भी वातावरण को और रहस्यमय बना देती है। कहते है 6 बजे के बाद इस किले से आती है भयानक आवाजें और सज जाती है भूतो की महफिल। और इसके साथ ही लग जाता है डर का मंजर, यहां के लोग तो इस बारे में बात करने से भी कतराते है, पूछने पर सिर्फ ये ही पता चलता है, कि यहां भूतो का बसेरा है। किले की बात करे तो यहां कुछ अजीब सा एहसास होता है मतलब किसी के न होते हुए भी किसी के होने का आभास। कुछ लोग तो दावा करते है, कि अंधेरी रात में लोगों ने यहां पर भूतों का तांडव देखा है। किले से तरह-तरह आवाजें आते हुऐ भी सुनी है । यही वजह रही होगी कि रात में यहां पर किसी के आने की अनुमति नहीं है,  यहाँ सिर्फ भूत रहते हैं, रात में कोई भी व्यक्ति यहाँ रुकने की हिम्मत नहीं कर पाता है। गाँव वालों के हिसाब से यहां आने वाले लोगो को यह एहसास होने लगता है कि यहाँ कुछ अजीब हो रहा है, बच्चे से बूढ़े सभी को एक शक्ति जो नहीं दिख रही थी वह सताने लगती है, यहाँ अक्सर अजीब-अजीब चीजें घटित होती रहती हैं। बहुत सारे लोग यहां रोज आते और अलग अलग अनुभव लेकर जाते है।

 

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Pratiksha Srivastava

A multi-talented girl possesses a degree in mass communications who is proficient in anchoring and writing content. She has experience of 3 years for working in various news channels like India TV, News 1 India, FM news, and Aastha Channel and her expertise lies in writing for multiple requirements including news, blogs, and articles. Follow@Twitter

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